फज्र
गुजर गइ नमाजे फज्र और तु सोता रहा।
कीमती वक्त ख्वाबो मे खोता रहा ...
सुबह हुई पर तु बेदार न हुआ।
उम्रभर सो कर भी तु बेजार न हुआ।
जोहर
आई जोहर तो तुझे काम ने ऊलझा दिया।
बे नमाजी बनाकर कितना तुझे फसा दिया...
मिलेगा रिज्क तुझे नमाज के बाद भी।
पालेगा रब तेरा घर नमाज के बाद भी।
असर
देख आ गइ नमाजे अस्र तवानाइ लेकर।
कुव्वत है इसमे तु इसे अदा कर...
तंदुरस्त है तु आज ये शुक्र अदा कर।
बदन को अपने तु सजदो की लज्जत दिया कर।
मगरीब
चल दीया आफताब अब गुरुब होने को।
नमाजे मगरीब है अब शुरू होने को...
खत्म हो गया तेरी जिंदगी का एक और दीन।
चला गया ये भी हाथ से तेरे नेकीयों बिन
इशा
अब तुझे चाहिये रात सोने से पहले।
इशा पढले अपनी जिंदगी खोने से पहले..
पाऐगा सुकुन तु अल्लाह के जिक्र मे ।
मिलेगा करार तेरे दिल को इसी फिक्र मे।

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